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Blog Post 07: The OLD AGE

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बुढ़ापा  (The OLDAGE) उम्र का आखिरी पड़ाव होता है। मानसिक तौर पर बुढ़ापा, महसूस करने की चीज है। अगर आप positive minded इंसान है तो ८० साल में भी आप मानसिक और शारीरिक तौर पर खुद को और अपने आस पास के लोगोंको जवान महसूस करा सकते  है। लेकिन नकारात्मक सोच के चलते आप ४० साल में भी बूढ़े लग सकते हो। वैसे बुढ़ापे में और भी कुछ परिस्थितियाँ depression   केलिए कारणीभूत हो सकती हैं। ज्यादातर देखा गया है की बुढ़ापे में मृत्यु का डर, आर्थिक चिंता, अकेलापन, किसी नजदीकी दोस्त, रिश्तेदार या अपने जीवनसाथी की अकस्मात मृत्यु,  ये depression की वजह हो सकती हैं।  पुराने जमाने में संयुक्त परिवार (joint family) प्रणाली कार्यक्षम थीं। तो बुढ़ापे तक पूरा परिवार संघटित रहता था। बदलते वक्त के साथ जमाना बदल गया और अब एकल परिवार (nuclear family) प्रणाली कार्यक्षम हो गयी। बच्चे बड़े होकर अपने नौकरी, व्यवसाय के बेहतर संभावनाओं (prospects) केलिए घर से दूर दूसरे शहर, दूसरे देश में स्थित होने लगे। माता-पिता मेहनत कर अपने बच्चोंको उनके उज्...

Blog Post 06: The MIDDLE AGE

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MIDLIFE CRISIS साधारण जिंदगी में   Midlife crisis  भी स्त्री-पुरुषों  में depression की एक  वजेह हो सकती है। Midlife crisis का शोध मनोवैज्ञानिक  Carl Jung    ने लगाया था और उनके हिसाब से ये परिपक्व (matured) होने की प्रक्रिया का साधारण प्रमाण है। 38-40 उम्र के बाद, लोगों को इस प्रक्रिया में एक भावनिक संक्रमण (emotional transition) का अनुभव होता है। इसके चलते कुछ लोग अपनी जीवनशैली में आस पास की परिस्थितियों में परिवर्तन लाने की चाह रखते है और आसानी से कर भी सकते है। लेकिन जो आसानी से कर नहीं पाते वो लोग depression या चिंता (anxiety) के शिकार हो सकते है।  कई बार पैसा कमाने में पति पत्नी इतना मशरूफ हो जाते है की जिस वजह केलिए पैसे कमा रहे होते है वो वजह ही भूल जाते है। आज के जमाने में काफी लोग नौकरी लगते ही ४० की उम्र तक बहोत पैसा कमा कर ४० की उमर  में retirement  लेकर जो जिंदगी में करना चाहते है वो बिना किसी tension के करने की चाह रखते है। लेकिन ४० की उम्र तक अपनी मानसि...

Blog Post 02: The FEELING

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(The BLUES mood) पिछले blog में BLUES  का एक मनोवस्था के रूप में वर्णन किया था | इस blog   में BLUES या depression (अवसाद)में क्या महसूस होता है इसके बारे मे बताने की एक कोशिश रहेगी | सच कहा जाये तो इंसान depression   में कुछ महसूस ही नहीं करता | उसका मन शून्य अवस्था में होता हैं | वो कुछ सोच नहीं पाता, कुछ करना नहीं चाहता, किसीसे बात करना नहीं चाहता, आलसी सा हो जाता हैं | सिर्फ शांत पड़े रहना चाहता हैं | इसका परिणाम शारीरिक क्षमताओं पर भी होता हैं | कितने सारे cases में depressed इंसान घंटो तक, दिनों तक अपने रुम से, अपने घर से बाहर नहीं निकलना चाहता | ना कुछ सोच पाता हैं, ना कुछ बात कर पाता हैं, ना  किसी को कुछ समझा सकता हैं | एक ऐसी अवस्था जिसमे कभी कभी दिमाग और  मन में क्या चला रहा हैं ये ब्यान करना मुश्किल हो जाता हैं |   काफी बार हम  "feeling low" ऐसा कहते हैं | हम ही नहीं, पर हमारे दोस्त, सहकर्मी, हमारे परिवार में भाई-बहन, पिताजी,(माँ को छोड़ के क्योंकि उसे अगर ऐसा लगे भी तो ये कहना ...