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Blog Post 10: The OCD (Obsessive Compulsive Disorder)

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पिछले २ blogs में PHOBIA  के अलग अलग प्रकार और उनके इलाज के बारे में जानकारी देने का प्रयास था। इस blog में  OBSESSION और उससे जुडी मानसिक अवस्थाओं के बारे जानकारी देने का प्रयास रहेगा । वैसे  OBSESSION और  PHOBIA में ज्यादा फर्क नहीं है। PHOBIA में किसी चीज, व्यक्ति या परिस्थति के अनुभव के वजह से डर मन में बैठ जाता हैं। लेकिन अगर डर के बदले  एक प्रकार की घृणा मन में पैदा हो जाये है तो उसे  OBSESSION कहा जाता है। और उससे छुटकारा पाने की जगतोजहत एक मानसिक बिमारी का स्वरूप ले सकती है। किसी प्राणी के प्रति या  अकेले यात्रा करने का डर PHOBIA का रूप धारण कर सकता है लेकिन OBSESSION में घृणा किसी भी कचरे, गंदगी या जंतु से ज्यादातर जुडी हुई पायी जाती है। PHOBIA और OBSESSION में सबसे महत्त्वपूर्ण फरक ये होता है की PHOBIA के डर  की परिस्थिती टल जाने पर इंसान के मन की बेचैनी दूर हो जाती है लेकिन  OBSESSION में इंसान घृणा के भाव से छुटकारा नहीं पा सकता है। OBSESSION की  दू...

Blog Post 09: The PHOBIAS: Part 02

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पिछले blog में  PHOBIA से जुडी जानकारी देने का प्रयास था। इस blog में PHOBIA के इलाज से जुडी जानकारी देने का प्रयास है।  PHOBIA  के मरीज हर आयु वर्ग में पाए जाते है। बच्चे भी अपवाद नहीं है। वैसे हर उम्र की अपनी अपनी डर की अलग समस्या हो सकती है। बचपन में स्कुल जाने से बच्चे कतराते हैं, उन्हें स्कुल जाने के टाइम पर अचानक पेट दर्द होने लगता है। ये डर  एक नए वातावरण में घुलमिल जाने तक बना रहता है। कुछ समय बाद जब बच्चे स्कुल के वातावरण से जुड़ जाते है तो उनके मन में बैठा डर भी चला जाता है। विद्यार्थी दशा में परीक्षा या रिझल्ट के दिनों में कुछ ऐसा ही डर का सामना हर इंसान करता हैं। उस वक्त अगर परीक्षा टल जाए या रिझल्ट की तारीख आगे हो जाए तो उन्हें उस दिन बहोत सुकून मिलता है। मध्यम उम्र (middle age) में दूसरों पर जैसे office  में boss  पर अपना प्रभाव बनाने की जगतोजहत का डर और बुढ़ापे में शारीरिक तक्लीफों से झुंझने या अकेलेपन की सोच ये सब डर के मुख्य कारण बन सकता है।  सारे PHOBI...

Blog Post 08: The PHOBIAS: Part 01

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FEAR / डर / भय  और क्रोध (ANGER)  ये सब एक अनैच्छिक (involuntary) प्रतिक्रिया हैं। एक ऐसी भावना जो इंसान को खबरदार बनाती है। किसी संकट से बचने केलिए डर या क्रोध ही इंसान को सजग करता है । इसीलिए कुछ हद तक मन में डर और क्रोध का होना जायज होता है। दोनों सूरतों  में ये कार्य Andrenaline नामक hormone  करता हैं। जब हमे डर लगता है या क्रोध आता हैं तो शरीर में andrenaline  का प्रमाण बढ़ जाता है, जिसके वजह से दिल की धड़कन और सांस तेज होती है,  शरीर में खून का प्रवाह जोर से होने लगता है, आँखों की पुतलिया बड़ी होकर नजर तीक्ष्ण हो जाती हैं, रोंगटे खड़े हो जाते है। ये सारे बदलाव इंसान के मन को सामने आई परिस्थति का सामना करने केलिए सजग बनाती है।  जैसे ही संकट टल जाता है, ये सारी  शक्ति शरीर पर उलटा परिणाम करती है। जिसकी वजह से दिल जोर से धड़कता है, पसीने छूटने लगते है, फड़फड़ाहट होती हैं, गला सुखने लगता है। क्रोध के झटके ( Panic Attack ) से होते मानसिक तनाव और बदलाव के बारे मे...

Blog Post 05: The YOUNG AGE

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(PCSD) २४-२५ साल की उम्र भी वैसे एक नाजुक उम्र होती हैं जब अपनी पढ़ाई पूरी कर हम बाहरी दुनिया का मुकाबला करने केलिए कदम रखते हैं। इस बाहरी दुनिया का मुकाबला करने की मानसिकता कुछ अलग होती है और उम्र दर उम्र वो वक्त के चलते विकसित होती जाती है। पढीई पूरी हो चुकी होती हैं, पर मनचाही नौकरी मिलने में कभी कभी दिक्क्त आती हैं, समय लगता हैं। पहला मुकाबला यहीं से शुरू होता हैं। MBA या कोई दूसरी उच्च शिक्षा एक साथ पाने के बाद, दोस्तों की campus placement द्वारा बड़े कंपनियों में अच्छे salary package की नौकरी लग जाती हैं । हमारा किसी वजेह से selection नहीं होता। यहीं से मन में निराशा का बीज बोना शरू हो जाता हैं । दिन-रात पूरा समय साथ बिताने वाले यही दोस्त अचानक व्यस्त हो जाते हैं। नौकरी नहीं मिलती इसलिए फिर घरवाले, रिश्तेदार ताने मारना शरू करते है। कभी कभी पढ़ाई केलिय  माता-पिता ने कर्ज लिया होता है और अच्छी नौकरी लगने के बाद सारा कर्जा फिट जायेगा इस उम्मीद वो तांक लगाए बैठे होते है। ऐसे समय पर नौकरी नहीं मिलने की...